विशेष अनुसन्धान एवं विकास संगठन

विषय: ग्रामीण एवं शहरी साक्षरता मिशन

पृष्ठभूमि:

SRDO ने भारत को एक साक्षर एवं ज्ञान के भंडार के रूप में रूपान्तरित करने के स्वप्न के साथ साक्षर भारत की योजना को प्रारंभ किया है। इस योजना में भारत के सभी नागरिको को शिक्षा के साथ जोड़ने का विचार शामिल है। इसके तहत सरकारी योजनाओ में निजी संस्थाओ के सहयोग की जो आवश्यकता महसूस की जाती है उसी को पूरा करने के लिए SRDO द्वारा इस योजना को चलाया गया है। इस योजना के द्वारा देश भर में साक्षरता इस योजना का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। इस योजना के द्वारा भारत के सभी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रो को साक्षर बनाने की दिशा में प्रयत्न किया जा रहा है। इस योजना क तहत भारत के प्रधानमंत्री द्वारा डिजिटल भारत एवं साक्षर भारत का स्वप्न जो देश के नागरिको को दिया गया है उसे पूरा करने का विचार समाहित है। साक्षर भारत के अंतर्गत कल्पना किये गए एक सशक्त समाज का निर्माण करने में SRDO एक बेहद महत्वपूर्ण कारक साबित होने वाला है।यह साक्षरता अभियान विशेष रूप से ग्रामीण भारत के लिए लाभकारी साबित होगा जिससे देश को आर्थिक एवं सामाजिक लाभ मिलेगा एवं साक्षरता के द्वारा ग्रामीण जनसंख्या को स्वास्थ्य स्वच्छता एवं डिजिटल भारत जैसी योजनाओ का भी भरपूर लाभ मिल सकेगा।

साक्षरता की परिभाषा:

साक्षरता का अर्थ केवल हस्ताक्षर कर पाने की योग्यता भर नहीं है। जैसा कि प्रौढ़ साक्षरता के विभिन्न कार्यक्रमों में जोर देकर बार-बार बताया जाता है। इन अभियानों के चलते ‘साक्षरता’ का मतलब काफी सीमित अर्थों में लिया जाता है। जबकि वास्तविक अर्थों में देखें तो साक्षरता का अर्थ है कि व्यक्ति किसी सामग्री को अपनी भाषा में पढ़कर समझ सके। उसका आनंद ले सके। इसके साथ ही अपनी रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए अपनी इस क्षमता का इस्तेमाल कर सके। SRDO इसी प्रकार की अवधारणा को लेकर कार्य कर रहा है।

उद्देश्य:

SRDO का उद्देश्य सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की जनसँख्या को पूर्ण रूप से साक्षर बनाने का है,SRDO विश्वास रखता है की सभी व्यक्तियों के विकास में ही देश का विकास निहित है।

जब किसी देश का विकास होता है तो उसकी समस्त जनसँख्या का विकास अपने आप हो जाता है उसी प्रकार जब किसी देश की जनसँख्या विकास करती है वह देश भी स्वयं विकास करना प्रारंभ कर देता है।यदि हमारे देश का प्रत्येक नागरिक साक्षर हो जायेगा तो हमारा देश अपने आप विकास के मार्ग पर तीव्र गति से चलेगा।

कार्यशैली:

SRDO उसके सदस्यों द्वारा निर्मित कार्यशैली के अनुरूप कार्य करने वाली संस्था है एवं उसी के अनुरूप वह कार्य करती है । SRDO द्वारा स्वयं केंद्रीय स्तर पर इस योजना की निगरानी की जाएगी । इसे जिला,ब्लॉक एवं ग्रामीण समितियों द्वारा सक्रिय सहयोग प्राप्त होगा था इसके साथ सरकारी एवं गैर सरकारी जिस भी प्रकार की सहायता की आवश्यकता संस्था को महसूस होगी उसे प्राप्त करने का प्रयास समस्त ढांचे द्वारा किया जायेगा।

SRDO की सभी योजनाओ को समस्त भागीदारो एवं सभी प्रशिक्षण केन्द्रों तथा सभी गठित समितियों का मत लेकर लागू किया जायेगा। योजना से देश की प्रारंभिक पीढ़ी को विशेष रूप से तैयार किये गए पाठ्यक्रम के द्वारा प्रशिक्षित करके उनके उज्जवल भविष्य में भागीदार बनना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

SRDO के उम्मीदवारों का आवंटन प्रशिक्षण केन्द्रों को एक विशिष्ट योजना के तहत किया जायेगा और SRDO द्वारा राज्य अथवा देश में जो लक्ष्य निश्चित किया गया है

उन्हें प्राप्त करना सुनिश्चित करना होगा।

योजना का कार्यस्थल:

यह योजना देश के ग्रामीण क्षेत्रो में फैली अशिक्षा को ध्यान में रख कर बनाई गयी है परन्तु योजना को आवश्यकता के अनुसार शहरी परिवेश में ढालने में SRDO प्रयासरत है । पूरे देश में 2.50 लाख ग्राम पंचायतो को शिक्षित करने का लक्ष्य इस योजना में परिलक्षित होता है तथा इस योजना में प्रधानमंत्री द्वारा संदर्भित डिजिटल साक्षरता,ई-गवर्नेंस एवं मेक इन इंडिया को भी प्रमुख रूप से परिभाषित किया जायेगा।

 

विशेष अनुसन्धान एवं विकास संगठन की योजना के अंतर्गत राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशो में समितियों का गठन किया जाना है। राज्य स्तरीय समिति: राज्य अथवा केन्द्रशासित प्रदेश की समिति का गठन SRDO (विशेष अनुसन्धान एवं विकास संगठन) के अध्यक्ष की सम्मति एवं SRDO समिति की सर्वसम्मति से किया जायेगा।

समिति की योजना:

(i) राज्य स्तरीय समिति :

प्रदेश शिक्षा विकास अधिकारी

सदस्य: 1. राज्य शिक्षा समन्वयक

2.ब्लाक शिक्षा समन्वयक

  1. ग्रामीण शिक्षा समन्वयक
  2. महिला- बालिका शिक्षा समन्वयक

नोट : SRDO अध्यक्ष की अध्यक्ष की अनुमति के साथ समिति अध्यक्ष और समस्त समन्वयको को बैठक में किसी को भी सम्मानित,चयनित अथवा आमंत्रित करने का अधिकार होगा।

शर्ते :

  • हर माह समिति की कम से कम एक बैठक अवश्य प्रस्तावित होगी ।
  • राज्य में SRDO योजना को ग्रामीण स्तर पर समिति की निगरानी में लागू करना होगा।
  • राज्य अथवा ग्रामीण स्तर पर शासित केन्द्रों / भागीदारो द्वारा उठाये गये मुद्दों और समस्याओ को समिति के सहयोग से निर्देशित किया जायेगा तथा उनका पूर्णकालिक समाधान पेश किया जायेगा।

 

(!!) जिला स्तरीय समिति:

समिति की योजना: जिला स्तरीय समिति का गठन एवं प्रशिक्षण,केंद्र की योजना एवं चयनित अभ्यर्थियों के प्रशिक्षण एवं समक्ष उपस्थित समस्त समस्याओ का निवारण करना।

जिला विकास अध्यक्ष:

  • SRDO द्वारा चयनित अभ्यर्थी
  • महिला बालिका विकास अधिकारी
  • प्रशिक्षण अधिकारी

उद्देश्य: जिला विकास अधिकारी के साथ समिति के समस्त सदस्य बैठक में लेने के लिये अथवा समस्याओ के निराकरण के लिए बैठक में क्षेत्र के सम्मानित व्यक्तियों एवं शिक्षा प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके SRDO की योजना को पूर्ण लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सभी संसाधनों का उपयोग करके योजना को पूर्ण रूप तक लेकर आना।

शर्ते:

  • जमीनी स्तर पर शिक्षा के विकास के लिए जो योजना प्रारंभ की गयी है उसकी निगरानी करना ।
  • राज्य में इस योजना के क्रियान्वयन के लिए शामिल प्रशिक्षण केन्द्रों / भागीदारो द्वारा उठाये गये मुद्दों और सिफ़ारिशो को केंद्र की अनुमति लेकर

उसके समाधान को समिति के समक्ष प्रस्तुत करना।

  • समिति को महीने में कम से कम दो बार मिलना चाहिए और SRDO के प्रसार की रिपोर्ट समिति के समस्त पेश करना।

 

प्राइमरी ट्यूशन टीचर हेतु चयन प्रक्रिया:

केन्द्रीय समिति द्वारा प्रत्येक माह अलग अलग राज्यों में अलग अलग जिलो में प्रतिभागियों का चयन पूर्ण पारदर्शित तरीके से किया जाता है।

समिति द्वारा सर्वप्रथम नियुक्ति हेतु विज्ञप्ति दी जाती है उसके पश्चात प्रस्तावित पदों को भरने हेतु ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से फॉर्म उपलब्ध कराए जाते है। पद हेतु इच्छित अभ्यर्थीयो के आवेदन प्राप्त होने के पश्चात समिति एक साक्षात्कार का आयोजन करती है जिसे SRDO द्वारा दो चरणों में पूर्ण किया जाता है। प्रथम चरण में साक्षात्कार प्रकिया जिला स्तरीय प्रशिक्षण केंद्र पर की जाती है था उसके पश्चात चयनित अभ्यर्थी का साक्षात्कार SRDO की केंद्रीय समिति द्वारा दिल्ली स्थित मुख्यालय में लिया जाता है । इस चयन प्रक्रिया में उत्तीर्ण होने के बाद अभ्यर्थी अंतिम रूप से चयनित माना जायेगा। चयनित अभ्यर्थियों को क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र पर एक महीने का प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।

मानदेय: केन्द्रीय बोर्ड द्वारा चयनित अभ्यार्थियों को SRDO द्वारा 7500 से 10000 प्रतिमाह का वेतनमान योग्यता अनुसार प्रस्तावित किया गया है। अन्य कोई भी भत्ते SRDO द्वारा वहन नहीं किये जायेगे।

 

पात्रता:

  • व्यक्ति को सम्बंधित राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • सामान्य वर्ग के व्यक्तियों के लिए आयु 18 से 35 वर्ष तथा अन्य सभी वर्गों/विकलांगो/भूतपूर्व सैनिको को नियमानुसार छूट है।
  • आवेदित व्यक्ति को फॉर्म के साथ 700 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट “लाइफ फ्लेम फाउंडेशन (Life Flame Foundation)” नयी दिल्ली के पक्ष में संलग्न करके दिल्ली मुख्यालय के पते पर अथवा क्षेत्रीय कार्यालय में निर्धारित तिथि पर जमा कराना होगा।

 

छात्र प्रशिक्षण केंद्र:

ग्रामीण स्तर पर चयनित अभ्यार्थियो द्वारा स्वयं वहन किये जायेंगे तथा उनके मापदंडो को पूरा करने के लिए निम्न आवश्यकता होगी:

  • प्रशिक्षण केंद्र सुगम पहुंच एवं स्वच्छ वातावरण वाला होना चाहिए।
  • यदि केंद्र किसी अन्य पक्ष द्वारा शिक्षक को उपलब्ध कराया गया है तो सम्बंधित व्यक्ति अथवा संस्था से एक पूर्ण अनुमति पत्र सरकारी स्टाम्प पर लिखित प्राप्त करना होगा तथा इस पात्र को ग्राम प्रधान अथवा ग्राम सरपंच द्वारा अनुमोदित होना चाहिए।
  • बच्चो की सुरक्षा एवं उनके विकास का उचित वातावरण होना चाहिए।
  • जिला समिति एवं केन्द्रीय समिति के अवलोकन के पश्चात की केंद्र को अनुमति प्रदान की जाएगी ।
  • केन्द्रीय एवं जिला समिति के समस्त सदस्यों को पूर्ण अधिकार होगा की वो कभी भी प्रशिक्षण केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते है।
  • कोई भी कमी पाई जाने पर दो बार चेतावनी दि जाएगी एवं तीसरी बार में 10 दिन के वेतन काट लिया जायेगा,एवं अगर इसके पश्चात भी स्थिति नहीं सुधरती है तो शिक्षक को निष्काषित किया जा सकता है। इसका समस्त अधिकार केन्द्रीय समिति के पास होगा।कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था अथवा कोई भी उपक्रम,केन्द्रीय समिति के निर्णय को चुनौती नहीं दे सकता है।

 

प्रशिक्षण केन्द्रों की भूमिका:

प्रशिक्षण केंद्र पर चयनित उम्मीदवारों की भूमिका-

  • पाठ्यक्रम के लिए ग्रामीण क्षेत्रो से छात्रों का चयन
  • छात्रों का नामांकन
  • छात्रों की पूर्णकालिन उपस्थिति सुनिश्चत कराना
  • सभी छात्रों का साप्ताहिक/मासिक/त्रिमासिक व वार्षिक परीक्षा व रिजल्ट
  • केन्द्रीय समिति द्वारा दिए गये समस्त लक्ष्यों को पूर्ण करना
  • प्रत्येक छात्र के अध्ययन के लिए परिणाम की उपलब्धि सुनिश्चित कराना
  • प्रत्येक परिणाम की जानकारी जिला कार्यालय एवं केंद्रीय समिति के समक्ष रखना
  • समय समय पर केंद्र द्वारा प्रायोजित प्रायोगिक परीक्षाओ में छात्रों एवं क्षेत्र में उपस्थित समस्त बच्चो को प्रोत्साहित करना ।

शिक्षक की भूमिका

  • एक शिक्षक जिला /ब्लाक/ग्राम पंचायतो में प्रशिक्षण केन्द्रों को स्थापित करने या खुद खोलने के लिए जिम्मेदार होगा।जो छात्रों को उचित साक्षरता प्रशिक्षण प्रदान करेगा।
  • एक शिक्षक के प्रशिक्षण केंद्र की जो जरूरते होगी उन्हें वहन करने के लिए वह उत्तरदायी होगा।
  • शिक्षक संस्था के अंतर्गत चलने वाले समस्त कार्यो की निगरानी के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगा।
  • शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के अंतर्गत चलने वाले सभी कार्यो की सूचना के लिए पूर्ण जिम्मेदार होगा।